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विस्मरण

vismran

अनुवाद : शिवम तोमर

बिली कॉलिन्स

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विस्मरण

बिली कॉलिन्स

और अधिकबिली कॉलिन्स

    सबसे पहले आप लेखक का नाम भूलते हैं

    फिर शीर्षक, कथानक और एक दारुण अंत

    एक समूचा उपन्यास अचानक से ऐसा उपन्यास बन जाता है

    जिसे आपने पढ़ा तो क्या सुना भी हो

    यह इस तरह होता है

    जैसे एक-एक कर सारी स्मृतियाँ

    जिन्हें आप आश्रय देते रहे हों

    सेवानिवृत्त होकर दिमाग़ के दक्षिणी गोलार्ध की ओर

    जाना तय कर लें,

    एक छोटे से मछुआ-गाँव में

    जहाँ फ़ोन नहीं होते

    बहुत समय पहले,

    आपने अपने नौ म्यूज़ के नामों को अलविदा कहा था

    और द्विघात समीकरण को

    अपना बोरिया-बिस्तर बाँधते हुए देखा था

    इस क्षण भी

    जब आप ग्रहों के क्रम पर

    अपनी पकड़ पुख़्ता कर रहे हों

    कुछ कुछ धीरे-धीरे

    आपकी पकड़ से बाहर हो रहा है

    शायद एक राजकीय पुष्प का नाम,

    एक अंकल का पता

    या पैराग्वे की राजधानी

    जो कुछ भी आपको याद नहीं रहा

    वह तो अब आप की जीभ की नोक पर रखा है

    ही आपकी तिल्ली के किसी अँधेरे कोने में छिपा है

    बल्कि वह एक अंधकारमय पौराणिक नदी के साथ

    जिसका नाम शायद ‘ल’ से शुरू होता है

    दूर कहीं बह गया है

    इतना ही आपको याद है

    विस्मरण की उस राह पर चलते हुए

    आप ख़ुद उन लोगों में शामिल हो जाएँगे

    जो यह भी भूल चुके हैं कि तैरना कैसे होता है

    और साइकिल कैसे चलाई जाती है

    कोई अचंभे की बात नहीं

    जब आधी रात को आपकी नींद उचटती है

    आप ख़ुद को युद्ध पर लिखी गई एक किताब में

    किसी ख़ास लड़ाई की तारीख़ खोजता हुआ पाते हैं

    कोई अचंभे की बात नहीं

    खिड़की से दिखता हुआ चाँद

    एक ऐसी प्रेम कविता से बाहर निकलकर आया हुआ लगता है

    जो एक वक़्त आपको मुँह-ज़बानी याद हुआ करती थी।

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : बिली कॉलिन्स

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