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पानी में काले चीड़

pani mein kale cheeD

ग्वेन्डोलिन मैकवान

ग्वेन्डोलिन मैकवान

पानी में काले चीड़

ग्वेन्डोलिन मैकवान

और अधिकग्वेन्डोलिन मैकवान

    दर्पण की तरह यह धरती तुम्हें भीतर ले जाती है

    और तुम एक रहस्यमय ताल में जंगल बन जाते हो

    तुम्हारे मन के काले चीड़ झुकते हैं नीचे की ओर

    देखते हो तुम स्वप्न अपने समय की हरियाली में

    डूबते चीड़ों की पंक्ति तुम्हारी स्मृतियाँ हैं

    अन्वेषक, कहते हो तुम अपने से, यह नहीं वह जिसके लिए तुम आए

    थे

    हालाँकि अच्छा है यहाँ, हरियाली है;

    तुमने चाहा था एक विशालता के साथ आगे बढ़ना

    तुमने तय किया था एक बोझिल लालित्य, एक दुःखमय स्वप्न

    मगर तुम्हारे मन के काले चीड़ और गहरे डूबते हैं

    और तुम भी डूब रहे हो, डूब रहे हो,

    सरल दुनिया में सोने वाले;

    वहाँ गहरे कहीं कुछ है और तुम चाहते हो उसे बताना

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : कवि के साथ अनुवादक रीनू तलवाड़ और प्रचण्ड प्रवीर

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