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सभ लूटै छै लूटू ने लूट मचल छै

sabh lutai chhai lutu ne loot machal chhai

कलानन्द भट्ट

कलानन्द भट्ट

सभ लूटै छै लूटू ने लूट मचल छै

कलानन्द भट्ट

और अधिककलानन्द भट्ट

    सभ लूटै छै लूटू ने लूट मचल छै

    सक जकरा ने वैह इमनदार बनल छै।

    कागतपर देखू जँ देखक हो योजना

    धरतीपर सूखल आमील बनल छै।

    मारू विवेक चलू पेटो ने भरैछै

    नीति-कानय कुनीतिक अबार चलल छै।

    जँ चूकब तँ चूकब मुँह चकरी-होयत

    के कहत ऊँट कोन गरे बैसि रहल छै।

    बात रखवारक तँ कात करू-काका

    खोपड़िये खेत उजाड़ि रहल छै।

    स्रोत :
    • पुस्तक : कान्ह पर लहास हमर [मैथिली गजल संग्रह] (पृष्ठ 4)
    • रचनाकार : कलानन्द भट्ट
    • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
    • संस्करण : 1983

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