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बात होता कि सरग

baat hota ki sarag

अशोक द्विवेदी

अशोक द्विवेदी

बात होता कि सरग

अशोक द्विवेदी

और अधिकअशोक द्विवेदी

    बात होता कि सरग सीढ़ी लगावल जाई

    सबका मड़ई में कलर टीवी देखावल जाई

    राज 'छोटकन' के जर-जमीन रही 'बड़कन' के

    बीच का लोगन के गड़हा में भठावल जाई

    का करब लेके आजादी मुँहजबानी हम

    एमे अबरा के अन्हरचटकी खियावल जाई

    फेरु सुति जइहें स, फुसिलाई डाँटी माई

    एँतरे लइकन के कब तकले मनावल जाई

    जब भी बदलाव के देश में होई चरचा

    मुवला लोगन में से एगो के जियावल जाई

    साँच के दाबि के तूँ कहिया ले सूतल रहबऽ

    घींचि के चदरा जबरदस्ती जगावल जाई

    साँच बोलल बा कठिन तब्बो केहू बोलबे करी

    सबकर मुँहजाबि के सच कबले छिपावल जाई

    स्रोत :
    • पुस्तक : फूटल किरिन हजार (पृष्ठ 143)
    • रचनाकार : अशोक द्विवेदी
    • प्रकाशन : पाती प्रकाशन, बलिया
    • संस्करण : 2003

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