रतिया चान बिना अन्हरिया लगे
ratiya chaan bina anhariya lage
रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
Rambahadur ‘Adhir Pindvi’
रतिया चान बिना अन्हरिया लगे
ratiya chaan bina anhariya lage
Rambahadur ‘Adhir Pindvi’
रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
रतिया चान बिना जइसे अन्हरिया लगे।
सूनी तोहरी बिना अब सेजरिया लगे॥
खनके पायलिया मधुर धुनि छिड़े।
रहे टूटल जवन दिल फिरु से जुड़े॥
जब तोहरी करेजवा से लगि जानी हम,
स्वर्ग के सुख हमके सँवरिया लगे॥
रतिया चान बिना...
फूल बनिके चमन में महकल करींऽ।
रूप सोना सा लेके हम दहकल करीं॥
भौंरा बनि तू हम पर लोभाइल कर,
तोहरी आवेके जब भी खबरिया मिले॥
रतिया चान बिना...
पात तरुवर से तोहरे हम पूंछी पता।
तू तऽ हउव गुलाब हम लवंग लता।
आ जालऽ तऽ बगिया महँकि जाला,
दिल के भरल फूल फुलवरिया लगे॥
रतिया चान बिना...
हम तोहरी बिना कइसे जियबि।
जग के ताना बताव कइसे सहबि॥
तनी आपन सनेहिया लुटावल कर,
नीक तोहरी बिना ना अंजोरिया लगे॥
रतिया चान बिना...
- पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 65)
- रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
- प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
- संस्करण : 2010
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