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मेंहदी के हरियर पतिया

menhdi ke hariyar patiya

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

मेंहदी के हरियर पतिया

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

    मेहदी के हरियर पतिया में हो,

    बसे सजना के प्यार।

    रचि-रचि रचेली हथेलिया हो,

    रंग होखे चटकार॥...

    सावन मास सुहावन लागे।

    बहे पुरुवइया तऽ यौवन जागे॥

    बड़ी नीक लागेला सेजरिया हो,

    घर हो सजना हमार। मेंहदी...

    सावन मास खिले मेहदी के रंगवां।

    झुलुआ के पेंग भरी सखियन के संगवां॥

    बड़ा नीक लागेला सवनवां हो,

    रिम झिम पड़ेला फुहार॥ मेंहदी...

    रिमझिम रिमझिम सावन बरसे।

    सइयां बिना मोर मनवा तरसे॥

    नीक नाहीं लागेला अंगनवा हो,

    चले पुरुवा बेयार॥ मेंहदी...

    रतिया के चाँद खिड़िकिया से झांके।

    चन्दा के मुंहवा सजन जइसे लागे॥

    बड़ा नीक लागेला अंजोरिया हो,

    चाँद ऊगे टहकार॥ मेंहदी...

    स्रोत :
    • पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 69)
    • रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
    • प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
    • संस्करण : 2010

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