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सुतल पियास जगावे ना! (बरखा राग)

sutal piyas jagave na! (barkha raag)

अशोक द्विवेदी

अशोक द्विवेदी

सुतल पियास जगावे ना! (बरखा राग)

अशोक द्विवेदी

और अधिकअशोक द्विवेदी

    होत फजिरहीं

    बदरा घहरे

    एको छिन ना बिलमे ठहरे रामा

    अरे रामा, रहि रहि जिउ ललचावे

    सुतल पियास जगावे ना!

    भर पखवारा राह तकवलस

    पुलुई धनवा के सुहुरवलस रामा

    अरे रामा थपकि-थपकि दुलरावे

    सँइचल नेह लुटावे ना!

    कतना राह तका के आइल

    निगिचा आके बा अकुताइल रामा

    अरे रामा उमड़ि-घुमड़ि नहवावे

    दे दे ताल नचावे ना!

    हिया जुड़ाइल, मन अगराइल

    दाबल साथ अउर सपनाइल रामा

    अरे रामा, छूइ-छूइ गुदुरावे

    मेघ-मल्हार सुनावे ना!

    स्रोत :
    • पुस्तक : फूटल किरिन हजार (पृष्ठ 39)
    • रचनाकार : अशोक द्विवेदी
    • प्रकाशन : पाती प्रकाशन, बलिया
    • संस्करण : 2003

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