Font by Mehr Nastaliq Web

संगीत पर नवगीत

रस की सृष्टि करने वाली

सुव्यवस्थित ध्वनि को संगीत कहा जाता है। इसमें प्रायः गायन, वादन और नृत्य तीनों शामिल माने जाते हैं। यह सभी मानव समाजों का एक सार्वभौमिक सांस्कृतिक पहलू है। विभिन्न सभ्यताओं में संगीत की लोकप्रियता के प्रमाण प्रागैतिहासिक काल से ही प्राप्त होने लगते हैं। भर्तृहरि ने साहित्य-संगीत-कला से विहीन व्यक्ति को पूँछ-सींग रहित साक्षात् पशु कहा है। इस चयन में संगीत-कला को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।

मैं वंशी

ठाकुरप्रसाद सिंह

मेघ आए

देवेंद्र कुमार बंगाली

पाँच जोड़ बाँसुरी

ठाकुरप्रसाद सिंह

संबंधित विषय

हिन्दवी उत्सव 2026

रजिस्टर कीजिए