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पुरुष पर दोहे

कहिं ससहरु कहिँ मयरहरु कहिँ बरिहिणु कहिं मेहु।

दूर-ठिाएँ वि सज्जणहँ होइ असड्ढलु नेहु॥

कहाँ चंद्रमा और कहाँ समुद्र! कहाँ मोर और कहाँ मेघ! दूर रहने पर भी सज्जनों का असाधारण स्नेह होता है।

हेमचंद्र

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