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पृथ्वी पर गीत

पृथ्वी, दुनिया, जगत।

हमारे रहने की जगह। यह भी कह सकते हैं कि यह है हमारे अस्तित्व का गोल चबूतरा! प्रस्तुत चयन में पृथ्वी को कविता-प्रसंग में उतारती अभिव्यक्तियों का संकलन किया गया है।

मेरा साया

श्यामबिहारी श्रीवास्तव

यदि आओगे फिर धरती पर

रत्नेश अवस्थी

हिन्दवी उत्सव 2026

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