पार्टनर, तुम्हारी प्राथमिकता क्या है?
प्राथमिकताएँ न तय कर पाने का संकट जीवन में निरंतर बना रहा है। इससे जूझना मानव की नियति ही रही है। यूँ कहें कि मनुष्य की विवशता ही उसकी नियति है। इधर बीच का जीवन, जो आधा पक चुका है—उसे किस शीतगृह में
02 अप्रैल 2026
गद्य होती कविता, थकता हुआ कवि
जिस दौरान नवंबर बीत रहा था, उसी दौरान घर में एक नया जीवन उतर रहा था। मेरा मन हर घड़ी लगभग बैठा जाता था। लगभग घंटे दो घंटे बाद लगता—अब निकले प्राण कि तब निकले, लेकिन निकले अभी तक नहीं। अब यह कहने की को