उत्तर मध्यकालः रीतिकाल (संवत् 1700-1900)
प्रकरण 1 सामान्य परिचय हिंदी काव्य अब पूर्ण प्रौढ़ता को पहुँच गया था। संवत् 1598 में कृपाराम थोड़ा-बहुत रसनिरूपण भी कर चुके थे। उसी समय के लगभग चरखारी के मोहनलाल मिश्र ने 'शृंगारसागर', नामक एक ग्रंथ शृंगारसंबंधी लिखा। नरहरि कवि के साथी करनेस कवि ने
आचार्य रामचंद्र शुक्ल
इकाई—1 भारतीय काव्यशास्त्र की परंपरा
संस्कृत के काव्यशास्त्रीय उपलब्ध ग्रंथों के आधार पर भरतमुनि को काव्यशास्त्र का प्रथम आचार्य माना जाता है। समय लगभग 400 ईसापूर्व से 100 ईसापूर्व के मध्य समय माना जाता है। इस परंपरा के अंतिम आचार्य पंडितराज जगन्नाथ है इनका समय 17 वीं शती है। इस प्रकार
हिन्दवी डेस्क
भक्तिकाल : पूर्व-मध्यकाल (निर्गुण धारा)
भक्तिकाल : पूर्व-मध्यकाल प्रकरण 2 निर्गुण धारा ज्ञानाश्रयी शाखा कबीर—इनकी उत्पत्ति के संबंध में अनेक प्रकार के प्रवाद प्रचलित हैं। कहते हैं, काशी में स्वामी रामानंद का एक भक्त ब्राह्मण था जिसकी विधवा कन्या को स्वामी जी ने पुत्रवती होने का आशीर्वाद