वृंदावनलाल वर्मा के उद्धरण

तल्लीनता के साथ शून्य ध्यान में मग्न हो जाना यही असली ध्यान है।
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मैं कहूँगा और फिर कहूँगा। समय कहेगा और संसार कहेगा। इतिहास कहेगा और कहानियाँ कहेंगी। मुझे मार डालो, इससे आप लोगों की अपकीर्ति का प्रवाद रुकेगा नहीं।
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