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वृंदावनलाल वर्मा

1889 - 1969 | झाँसी, उत्तर प्रदेश

हिन्दी के ऐतिहासिक उपन्यासकार, कहानीकार और नाटककार। रोचक और धाराप्रवाह वर्णनात्मक शैली। भाषा में बुंदेलखंडी पुट।

हिन्दी के ऐतिहासिक उपन्यासकार, कहानीकार और नाटककार। रोचक और धाराप्रवाह वर्णनात्मक शैली। भाषा में बुंदेलखंडी पुट।

वृंदावनलाल वर्मा के उद्धरण

तल्लीनता के साथ शून्य ध्यान में मग्न हो जाना यही असली ध्यान है।

मैं कहूँगा और फिर कहूँगा। समय कहेगा और संसार कहेगा। इतिहास कहेगा और कहानियाँ कहेंगी। मुझे मार डालो, इससे आप लोगों की अपकीर्ति का प्रवाद रुकेगा नहीं।

धर्म की आज्ञा सबसे ऊपर होती है।

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