मन में जब दुःख देवता का आगमन हो, उस समय उसका सबसे बड़ा आदर यही हो सकता है कि उसे पाकर मनुष्य अपना खान-पान तक भूल जाय। दुःख के बीच में ऐसा आनंद न हो तो उसे ग्रहण ही कौन करे?
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पुस्तकें 3
अंक-010
अंक-012
अंक-008
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