श्रीहर्ष के उद्धरण

शिष्टाचार के कारण अपनी आत्मा को भी तिनके के समान लघु बनाना चाहिए, अपना आसन छोड़कर अतिथि को देना चाहिए, आनंद के अश्रुओं से जल देना चाहिए और मधुर वचनों से कुशलक्षेम पूछना चाहिए।
-
संबंधित विषय : शिष्टाचार
-
शेयर
- सुझाव
- प्रतिक्रिया

देवता प्रसन्न होने पर और कुछ तो नहीं देते, सद्बुद्धि ही प्रदान करते हैं।
-
संबंधित विषय : ईश्वर
-
शेयर
- सुझाव
- प्रतिक्रिया


जिसका जन्म याचकों की कामना पूर्ण करने के लिए नहीं होता, उससे ही यह पृथ्वी भारवती हो जाती है, वृक्षों, पर्वतों तथा समुद्रों के भार से नहीं।


दोष से भी दोष की लघुता हो जाती है, जैसे अज्ञान से है। पाप की गुरुता कम हो जाती है।
-
शेयर
- सुझाव
- प्रतिक्रिया