बिशन की दिलेरी
सुबह का समय था। पहाड़ों के पीछे से सूरज झाँक रहा था। दस वर्ष का बिशन घर से बाहर निकल आया। वह रोज़ इसी समय, इसी रास्ते से कर्नल दत्ता के फ़ार्म हाउस पर जाता है। कर्नल दत्ता की पत्नी पढ़ाई में उसकी मदद करती हैं। फ़ार्म से लगे सेबों के बाग़ में कीटनाशक