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ब्लैक होल्स की द्विअर्थी दुनिया

स्टीफ़न हॉकिंग के ब्लैक होल पर दिए इस लेक्चर (2016 BBC Reith Lectures on black holes) को पढ़ते-पढ़ते एक शहर से दूसरी सहर में आ गए। ‘नव भारत’ की ट्रेनों में मिलने वाले रोटीनुमा या परांठानुमा या रोटी और परांठे के खच्चरनुमा वर्णसंकर पदार्थ को कैसे संबोधित करें, इस दुविधा को भाषाविदों से शाया करने का विचार करते हुए कई स्टेशन गुज़र गए। रास्ता गुज़र गया। दिन गुज़र गया।

थ्योरेटिकल फ़िजिसिस्ट जॉन व्हीलर ने सन् 1967 में ‘फ्रोज़न स्टार’ फ़ेनोमेनन को नया नाम ‘ब्लैक होल’ दिया। यह नाम उसके बनने की प्रक्रिया से स्वतंत्र होकर उसके वर्तमान रहस्यमयी स्वरूप और उसमें छिपी अनंत वैज्ञानिक संभावनाओं पर फ़ोकस करता है, लेकिन फ़्रेंच विज्ञान जगत ने इस नए नाम का लंबे समय तक विरोध किया। उनके अनुसार यह नाम अश्लील था। शायद उन लोगों को यह लग रहा था कि जॉन व्हीलर जानबूझकर यह द्विअर्थी मज़ाक़ कर रहे हैं।

फ़्रेंच लोगों के इस विरोध के बारे में बताते वक़्त स्टीफ़न हॉकिंग एक टर्म यूज़ करते हैं—‘But the French, being French...’ मानो कह रहे हों कि इन फ़्रांसिसीयों की तो हमेशा की आदत है—बाल की खाल निकालना।

आगे जॉन व्हीलर ने ‘An American being an American’ को चरितार्थ करते हुए, अपने विरोध के मद्देनज़र ब्लैक होल की कार्यप्रणाली के सिद्धांत का नामकरण किया—‘No-hair theorem’ और अपने इस विचार को ‘Black holes have no hair’ वाक्यांश से व्यक्त किया।

ब्रह्मांड हम इंसानों के लिए अनंत रहस्यों से भरी कंदरा है और ब्लैक होल उसके द्वारपाल की तरह अभी हमारे सबसे नज़दीक खड़ा अजनबी है। ऐसा अजनबी जिससे परिचय हो पाने का ख़याल भी अभी हमारे विज्ञान की ज्ञात सीमाओं में नामुमकिन है।

कुछ महीनों पहले ही हमारे सौरमंडल से 3I/Atlas नामक इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट गुज़र कर गया जिसके अपारंपरिक व्यवहार की वजह से उसके वास्तविक परिचय को लेकर दुनिया भर का वैज्ञानिक समुदाय अब तक अनिश्चित है। कुछ वैज्ञानिक ‘वाइल्ड गेस’ में उसे किसी दूसरी आकाशगंगा की विकसित चेतना वाली सभ्यता के संभाव्य इंटरस्टेलर प्रोब की तरह देख रहे हैं। यह 2017 में इस तरह के पहले ज्ञात इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट के बाद मात्र दस सालों में तीसरा ‘प्रोब’ है। पहले का नाम था ‘Oumuamua’—हवाईयन भाषा में जिसका अर्थ है ‘बहुत दूर से आने वाला पहला संदेशवाहक’।

मात्र दस सालों में तीन!

उसके पहले क्या हुआ वह या तो हम जानते नहीं या केवल कुछ लोग जानते हैं जो यह निर्धारित करते हैं कि क्या, कब, किसको और कितना बताया जाना है। ठीक वैसे ही जैसे अभी अमेरिका ने अपनी कई दशकों की सीक्रेट UFO फ़ाइल्स (जिनका नया नामकरण UAP है) पब्लिक की हैं। जिनके बारे में कई लोग मानते हैं कि उन्हें दबाये रखना और पब्लिक करना, दोनों उस अमेरिकी कलाकारी का नमूना है—जिसकी आड़ में वह अपने अतिउन्नत मिलिट्री प्रोब्स को दुनिया की नज़र से छुपाकर रखना चाहता है।

बाक़ी रहे वे, जिनका अभी तक एलियन कॉस्पिरेसी थ्योरिस्ट कहकर मज़ाक़ उड़ाया जाता रहा था। वे इस घटना को अपनी जीत बता रहे हैं। सच क्या है, वह सच के ब्लैक होल में है।

मज़ेदार यह है जो ख़ुद एक प्रोब यानि खोजी है, वह हमारे लिए संदेशवाहक भी है। पर इन संदेशों को डीकोड करना बहुत आसान नहीं है। बशर्ते ब्रह्मांडीय भाषाओं और लिपियों के ब्लैक होल से हम अपने काम का कुछ ऐसा निकाल कर ला पाएँ जिसका कोई दूसरा अर्थ न निकल रहा हो।

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