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खूब चंंद्र

बुंदेली फागों के लिए स्मरणीय कवि।

बुंदेली फागों के लिए स्मरणीय कवि।

खूब चंंद्र के दोहे

आवत सखी बसंत के, कारन कौन विशेष।

हरष त्रिया को पिया बिना, कोइल कूकत देख॥