noImage

रीतिकाल के नीतिकवि।

रीतिकाल के नीतिकवि।

बुधजन की संपूर्ण रचनाएँ

दोहा 42

बलधन मैं सिंह ना लसैं, ना कागन मैं हंस।

पंडित लसै मूढ़ मैं, हय खर मैं प्रशंस॥

  • शेयर

रोगी भोगी आलसी, बहमी हठी अज्ञान।

ये गुन दारिदवान के, सदा रहत भयवान॥

  • शेयर

अधिक सरलता सुखद नहिं, तेखो विपिननिहार।

सीधे बिरवा कटि गए, बाँके खरे हजार॥

  • शेयर

नहीं मान कुल रूप कौ, जगत मान धनवान।

लखि चँडाल के बिपुल धन, लोक करैं सनमान॥

  • शेयर

मनुख जनम ले क्या किया, धर्म अर्थ काम।

सो कुच अज के कंठ मैं, उपजे गए निकाम॥

  • शेयर

"जयपुर" से संबंधित अन्य कवि

  • संजीव मिश्र संजीव मिश्र
  • देवयानी भारद्वाज देवयानी भारद्वाज
  • हेमंत शेष हेमंत शेष
  • सवाई सिंह शेखावत सवाई सिंह शेखावत
  • पद्माकर पद्माकर
  • विजेंद्र विजेंद्र
  • रज्जब रज्जब
  • प्रमोद पाठक प्रमोद पाठक
  • ब्रजनिधि ब्रजनिधि
  • कुलपति मिश्र कुलपति मिश्र