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ग्रीष्म की छत

greeshm ki chhat

अनुवाद : शायक आलोक

चोमान हार्दी

चोमान हार्दी

ग्रीष्म की छत

चोमान हार्दी

और अधिकचोमान हार्दी

    उस ग्रीष्म की हर रात

    जब हम छत पर सोने जाते

    मैं जगी रहती और

    सामने की उस छत को निहारती रहती

    जहाँ वह रहता था

    एक छोटी-सी रोशनी जल उठती

    जब भी वह सिगरेट के कश खींचता

    एक बार किसी ने उसकी पेंटिंग्स दिखाई

    और मैं घर लौटी

    और मैंने किताबों के हर पन्ने पर उसका नाम दर्ज कर दिया

    करती रहती कल्पनाएँ कि इस बात पर क्या कहेगा वह

    उस बात पर क्या देगा जवाब

    मैंने उसकी ब्याहता होने की कल्पना भी कर ली

    वह बीमार पड़े तो उसकी देखभाल करना

    उसके लिए खाना बनाना, उसके बाल धोना

    एक ही छत पर एक साथ सोना

    एक पूरा साल बीत गया

    और कभी हमारी बात नहीं हुई

    फिर अचानक ही सामने का वह घर ख़ाली हो गया

    एक ख़ाली छत

    जो अब मुझे लौटकर नहीं देखती थी

    और मेरे हिस्से गई थीं

    उनींदी रातें

    सालों बाद हम फिर मिले—

    वही आदमी, जिसकी कुछ उँगलियाँ अब ग़ायब थीं

    स्वभाव से चिड़चिड़ा हो गया था

    और पेंटिंग्स उससे बनती थीं

    हमारी कभी बात नहीं हुई

    हम अपनी-अपनी अलग छतों पर ही बने रहे।

    स्रोत :
    • रचनाकार : चोमान हार्दी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए शायक आलोक द्वारा चयनित

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