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दिल से दिल तक

dil se dil tak

अनुवाद : शायक आलोक

रीटा डव

रीटा डव

दिल से दिल तक

रीटा डव

और अधिकरीटा डव

    यह तो लाल है

    और ही मीठा

    यह पिघलता नहीं

    या पलटता नहीं

    टूटता नहीं, कठोर होता है

    इसलिए यह महसूस नहीं कर सकता

    दर्द

    तड़प

    या पछतावा

    इसके पास नहीं है

    घूमने के लिए कोई नुकीला शीर्ष

    इसका तो कोई

    सुंदर आकार भी नहीं—

    बस मांसपेशियों का

    एक घना पुंज

    असममित

    और मौन

    लेकिन फिर भी

    मैं इसे अपने भीतर महसूस करती हूँ

    यह है अपने पिंजरे में गूँजता हुआ

    एक मंद ताल की तरह : मैं चाहता हूँ, मैं चाहता हूँ—

    लेकिन मैं इसे खोल नहीं सकती :

    इसकी कोई चाबी नहीं है

    मैं इसे

    अपनी आस्तीन पर नहीं पहन सकती

    ही तुम्हें बता सकती हूँ

    इसकी गहराइयों से

    कि मैं कैसा महसूस करती हूँ

    लो,

    इसे मैं तुम्हें सौंपती हूँ—

    लेकिन फिर तुम्हें

    मुझे भी

    साथ लेना होगा।

    स्रोत :
    • रचनाकार : रीटा डव
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए शायक आलोक द्वारा चयनित

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