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मैं कौन हूँ?

main kaun hoon?

अनुवाद : इबोहल सिंह काड़्जम

युमनाम मंगीचंद्र

युमनाम मंगीचंद्र

मैं कौन हूँ?

युमनाम मंगीचंद्र

और अधिकयुमनाम मंगीचंद्र

    नहीं बताऊँगा!

    मैं सब जानता हूँ,

    अमीर घरों की

    मज़ेदार कहानी।

    ग़रीब के परिवार में—

    होने वाली दुखद घटना,

    खाने-पीने के अभाव के अतिरिक्त

    बहुसंतान वाले होने का कष्ट,

    पेट भर खाने को मिले

    कई हैं, कई।

    संपन्न परिवार के लोग

    उपेक्षा करते हैं ग़रीबों की।

    ग़रीब समुदाय के लोग

    सुनना चाहते हैं अमीरों की कहानी।

    अपने-अपने भाग्य की—

    निंदा करने वाले भी कई हैं।.

    बड़े घरों में—

    पैरवी करने की कहानी,

    रोहु, मांगुर, बोआरी का ढेर।

    निराश होकर लौटने वाले भी कई हैं।

    कुशल है उसकी गृहिणी,

    दूसरों को दुखी नहीं करती।

    नहीं हो पाया तो भी—

    प्रयास किया जाएगा, भविष्य में ज़रूर हो जाए।

    सारा सौदा

    उसकी गृहिणी के साथ तय किया जाता है,

    वर्तमान युग का प्रचलित

    नियम है पैरवी का।

    कृष्ण को पाने के लिए

    राधा की शरण में जाने जैसा

    बड़े-बड़ों की पत्नी की

    शरण में जाया जाता है, की जाती है पैरवी।

    अस्पताल के भीतर के गुप्त हिसाब

    कोई भी नहीं जानता।

    इंजेक्शन लगवाओ, दवा नहीं दी जाती

    दवा नहीं मिलती,

    लगाने का मलहम तक।

    मिले हुए हैं दवा की दुकानें और कर्मचारी

    लगातार।

    जितना चिल्लाएँ

    जितना कहें

    कुछ भी फ़ायदा नहीं

    ठेकेदार और इंजीनियर

    मिलकर ठेका लेने की कहानी

    “पर्सेनटिज़”।

    अजीब तमाशा है।.

    इंजीनियर ऑफ़िस में

    नीचे से ऊपर तक

    पैरवी किए बग़ैर बिल पाना

    आसान काम नहीं है,

    विधायक ठेकेदार को तो

    बिल जल्दी मिलता था।

    राजनीति वालों की ठगी से

    जनता का सिर चकरा जाता है।

    पैसे वालों के दल

    स्कूलों की स्थापना करके

    भवन निर्माण करके

    जो पैसे कमा रहे हैं,

    मैं सब जानता हूँ।

    इस सब पर गहराई से सोचने से—

    हम मणिपुरी हैं,

    हम एक हैं

    अपने आपको बरबाद किए हुए

    अपनी इज़्ज़त बचाने वाले

    जीने का लाभ नहीं पाने वाले

    मैं सब जानता हूँ।

    तो—

    मैं कौन हूँ?

    स्रोत :
    • पुस्तक : आधुनिक मणिपुरी कविताएँ (पृष्ठ 113)
    • संपादक : देवराज
    • रचनाकार : युमनाम मंगीचंद्र
    • प्रकाशन : वाणी प्रकाशन
    • संस्करण : 1989
    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    ‘हिन्दवी डिक्शनरी’ हिंदी और हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों के शब्दों का व्यापक संग्रह है। इसमें अंगिका, अवधी, कन्नौजी, कुमाउँनी, गढ़वाली, बघेली, बज्जिका, बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, मगही, मैथिली और मालवी शामिल हैं। इस शब्दकोश में शब्दों के विस्तृत अर्थ, पर्यायवाची, विलोम, कहावतें और मुहावरे उपलब्ध हैं।

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