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भटक रही है आग भयानक

bhatak rahi hai aag bhayanak

ओसिप मंदेलश्ताम

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ओसिप मंदेलश्ताम

भटक रही है आग भयानक

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    रोचक तथ्य

    पित्रअपोल लेनिनग्राद पितेरबुर्ग या पीटर्सबर्ग नगर का एक साहित्यिक नाम है। पूश्किन से लेकर आज तक के विभिन्न रूसी कवियों ने अपनी कविता में इसे पित्रअपोल या पित्रोपोल के नाम से पुकारा है।

    भटक रही है आग भयानक, वहाँ उस ऊँचाई पे

    लग रहा है जैसे कोई तारा चमक रहा है

    निर्मल तारे भैया! भटक रही अग्नि!

    देख, यहाँ पे भाई तेरा पित्रअपोल मर रहा है

    जल रहे सपने धरती के, वहाँ उस ऊँचाई पे

    एक हरा तारा-सा कोई झलमल झमक रहा है

    जल के, आसमान के भाई तारे

    देख, यहाँ पे भाई तेरा पित्रअपोल मर रहा है

    उड़ रहा है यान बड़ा-सा, वहाँ उस ऊँचाई पे

    फैला अपने पंख गगन में भटक रहा है

    सितारे भैया आकर्षक, दीप्त हरे तारे

    देख, वहाँ तेरा भाई बेचारा, पित्रअपोल मर रहा है

    काली निवा नदी पर छाया वसंत पारदर्शी

    अमर बना देगा तुझे वह, अमृत-सा बह रहा है

    तू सितारा है यदि तो पित्रअपोल नगर है तेरा

    देख ज़रा, तेरा भाई यहाँ, पित्रअपोल मर रहा है

    स्रोत :
    • पुस्तक : सूखी नदी पर ख़ाली नाव (पृष्ठ 297)
    • संपादक : वंशी माहेश्वरी
    • रचनाकार : ओसिप मंदेलश्ताम
    • प्रकाशन : संभावना प्रकाशन
    • संस्करण : 2020

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