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मेरे लिए एक फ़ोन

mere liye ek fon

अनुवाद : सुरेश सलिल

रेम्को कैम्पर्ट

रेम्को कैम्पर्ट

मेरे लिए एक फ़ोन

रेम्को कैम्पर्ट

और अधिकरेम्को कैम्पर्ट

    फ़ोन पर से रिसीवर उठाता हूँ

    बताता हूँ अपना नाम।

    यह एक दिन तीसरे पहर का वाक़या है,

    और सुनता हूँ किसी के सुबकने की आवाज़—

    फिर दूसरी तरफ़ रिसीवर को फ़ोन पर

    वापस रख दिया जाता है।

    हे ईश्वर, अब क्या हो? सबसे पहले यह

    कि वह कौन हो सकता है? मेरे कान में सुबकने के लिए

    किसने मुझे फ़ोन किया होगा?

    बेचैनी से मैं कमरे में चक्कर काटता हूँ।

    बाद में बेचैनी से राहत पाकर

    गोश्त-भरा मुँह और हाथ में एक अच्छी तेज़

    छुरी लिए हुए मैं सोचता हूँ :

    और सोचने के क्रम में मैंने सोचा

    कि साठ का दशक अलग तरह का होगा

    उसका प्रेम से कोई कोई वास्ता होना चाहिए

    या किसी महान दुःख से

    या दोनों का एक मिलाजुला रूप...

    लेकिन किसी भी तौर पर

    मेरा नंबर ग़लत नंबर है।

    (दोबारा फ़ोन करिए

    और मेहरबानी करके रोना-धोना नहीं!)

    स्रोत :
    • पुस्तक : रोशनी की खिड़कियाँ (पृष्ठ 387)
    • रचनाकार : रेम्को कैम्पर्ट
    • प्रकाशन : मेधा बुक्स
    • संस्करण : 2003

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