इतनी क्षति मैंने दो बार के सिवा कभी नहीं सही
itni kshati mainne do baar ke siva kabhi nahin sahi
एमिली डिकिन्सन
Emily Dickinson

इतनी क्षति मैंने दो बार के सिवा कभी नहीं सही
itni kshati mainne do baar ke siva kabhi nahin sahi
Emily Dickinson
एमिली डिकिन्सन
और अधिकएमिली डिकिन्सन
इतनी क्षति मैंने दो बार के सिवा कभी नहीं सही
और वह मिट्टी के नीचे घटित हुई।
दो बार मैं याचक की तरह
प्रभु के द्वार खड़ी हुई।
देवदूतों ने दो बार उतर कर
पुनः भरा मेरा भण्डार—
चोर! साहूकार—पिता!
मैं हूँ रंक पुनः एक बार!
- पुस्तक : एमिली डिकिन्सन की कविताएँ : संचयन (पृष्ठ 33)
- रचनाकार : एमिली डिकिन्सन
- प्रकाशन : वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली
- संस्करण : 2011
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