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उगाए जाते रहे शहर

ugaye jate rahe shahr

राही डूमरचीर

राही डूमरचीर

उगाए जाते रहे शहर

राही डूमरचीर

दरमियाँ एक तालाब था

जो नदी-सा बहता था

अब कंक्रीट के महल हैं दरमियाँ

जो पानी की क़ब्र पर उगे हैं

यूँ ही नहीं गँवाया

शहरों ने आँखों का पानी

चुराई हुई मिट्टी डालकर

सुखाया गया है

इंतज़ार किया है शिद्दत से

शहर ने

तब से सिलसिले हैं

प्यास के

तरसता है शहर पानी के लिए

दर-ब-दर भटकते हैं शहरी

आँखों में पानी की ख़्वाहिश लिए।

स्रोत :
  • रचनाकार : राही डूमरचीर
  • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

‘हिन्दवी डिक्शनरी’ हिंदी और हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों के शब्दों का व्यापक संग्रह है। इसमें अंगिका, अवधी, कन्नौजी, कुमाउँनी, गढ़वाली, बघेली, बज्जिका, बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, मगही, मैथिली और मालवी शामिल हैं। इस शब्दकोश में शब्दों के विस्तृत अर्थ, पर्यायवाची, विलोम, कहावतें और मुहावरे उपलब्ध हैं।

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