बही जा रही है, बही! एक छोटी नाव!
bahi ja rahi hai, bahi! ek chhoti naav!
एमिली डिकिन्सन
Emily Dickinson

बही जा रही है, बही! एक छोटी नाव!
bahi ja rahi hai, bahi! ek chhoti naav!
Emily Dickinson
एमिली डिकिन्सन
और अधिकएमिली डिकिन्सन
बही जा रही है, बही! एक छोटी नाव!
और नीचे उतरने लगी रात!
कोई नहीं क्या जो एक छोटी नाव को राह दिखलाए,
निकटतम नगर तक उसे पहुँचा पाए?
नाविकों का कहना है—कल के दिन—
जैसे ही गोधूलि धूसर हुई,
एक छोटी नाव ने लड़ना बंद किया
और गड़गड़ाती हुई नीचे, और नीचे चली गई।
देवताओं का यह कहना है—कल के दिन,
जैसे ही भोर में लाली आई,
एक छोटी नाव ने—समुद्री हवाओं से थककर चूर—
अपने मस्तूल पुनः व्यवस्थित किए—अपनी पालें पुनः सजा लीं—
और उल्लासपूर्ण—तीर-सी—आगे बढ़ी।
- पुस्तक : एमिली डिकिन्सन की कविताएँ : संचयन (पृष्ठ 25)
- रचनाकार : एमिली डिकिन्सन
- प्रकाशन : वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली
- संस्करण : 2011
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