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केहू मनके नगरिया

kehu manke nagariya

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

केहू मनके नगरिया

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

    लूटि ले गइल केहू मन के नगरिया।

    दिल के दिवाना बनाके सँवरिया॥

    लूटि ले गइल...

    अँखिया की पुतलिन से दिल में समाके।

    अपनी पिरितिया के जादू चलाके॥

    तनिको भइल ना, दिल के खबरिया॥

    लूटि ले गइल...

    सुधि बुधि हेराइल सजनवां की प्यार में।

    बीति गइल रतिया करत इन्तजार में।

    सजना बसल कवनी, जाके शहरिया॥

    लूटि ले गइल...

    मन की बगिया के फुलवा फुलाइल।

    आवारा भौंरा बा मन बउराइल॥

    निकलीं डर से ना, दिन दुपहरिया॥

    लूटि ले गइल...

    बहुते 'अधीर' बा सजन बिनु मनवां।

    कब होई पूरा अब मन के सपनवां॥

    हँसी उड़ावेला सगरी नगरिया॥

    लूटि ले गइल...

    स्रोत :
    • पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 54)
    • रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
    • प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
    • संस्करण : 2010

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