केतना जवानी पर गुमान बाटे
ketna javani par guman bate
रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
Rambahadur ‘Adhir Pindvi’
केतना जवानी पर गुमान बाटे
ketna javani par guman bate
Rambahadur ‘Adhir Pindvi’
रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
तोहरा केतना जवानी पर गुमान बाटे।
जबकि जिनगी के कवनो ना ठेकान बाटे॥
लोभ, मोह, माया के मन में गरल बा।
झूठ फरेब करिके दौलति भरल बा॥
मन व्याकुल बा नाहीं मुसकान बाटे॥
तोहरा...
भाई भतीजा केहू काम ना आयी।
बेटवा तोहार धन पा के अगरायी॥
जेकरी चिन्ता में मन परेशान बाटे॥
तोहरा...
जवन तू करबऽ कीरति कमाई।
साथ में ऊहे तोहरी धन जाई॥
काहें भटकत तोहरो परान बाटे॥
तोहरा...
थकी शरीर कवनो काम ना आई।
सोचि-सोचि मनवा बहुत पछताई।
स्वारथी सगरी दिखत ई जहान बाटे।
तोहरा...
- पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 50)
- रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
- प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
- संस्करण : 2010
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