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हमरी गउवां के माटी अनमोल

hamri gauvan ke mati anmol

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

हमरी गउवां के माटी अनमोल

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

    हमरी गउवां के माटी अनमोल मितवा।

    एकर कइसे लगाई केहू मोल मितवा॥

    गउवां की मटिया के माथे लगाके।

    हरसे किसान गेहूँआ-धान उपजाके॥

    मटिया ई भरि देले अन्न से बखरिया।

    लागेला गउवां में हटिया बजरिया॥

    राखे लोगवा में बड़ी मेल जोल मितवा।

    हमरी गउवां के माटी अनमोल मितवा॥...

    एही मटिया के रतन हऽ किसनवां।

    सिमवां पर लड़ेला जेकर ललनवां॥

    मेहनति किसान करि सोना उपजावे।

    सीमा पर जवनवां भी जनवां गँवावे॥

    बोली गउवां के मिसिरी के घोल मितवा।

    हमरी गउवां के माटी अनमोल मितवा॥...

    तलवा-पोखरिया, बन-बाग अमराई।

    बरम असथान, डीह, सती, कालीमाई॥

    मंदिर में घन्टा, मसजिद में अजान बा।

    पूजत सुरुज केहू दुइजिया के चान बा॥

    नीक गउवां के हमरी भूगोल मितवा।

    हमरी गउवां के माटी अनमोल मितवा।...

    गुन मटिया के हम केतना बखानीं।

    सबके ई पाले राखे इज्जति पानी॥

    सबसे सिखावेले मटिया पिरितिया।

    सबसे निभावे भाईचारा के रितिया॥

    ओम हरिओम तत्सत् के बोल मितवा।

    हमरी गउवां के माटी अनमोल मितवा॥...

    स्रोत :
    • पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 85)
    • रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
    • प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
    • संस्करण : 2010

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