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गंध मदन के

gandh madan ke

भोलानाथ गहमरी

भोलानाथ गहमरी

गंध मदन के

भोलानाथ गहमरी

और अधिकभोलानाथ गहमरी

    रंग फागुन, बसंती रंगा गइलें राम,

    धरती-गगन रस बरिसेला।

    रंग…

    भोरे किरिनियाँ अबीरा उड़ावे,

    अंग-अंग लपिटा गइले राम।

    धरती-गगन…

    छलके गुलबवा के लाली गगरिया,

    आज पी-पी के मन बउरा गइलें राम।

    धरती-गगन…

    चन्दा के दरपन में पिउ की सुरतिया,

    बरबस नयन में समा गइलें राम।

    धरती-गगन…

    अमवाँ के मोजरा से गंध मदन के,

    घर-आँगन पवन ढरका गइलें राम।

    धरती-गगन…

    स्रोत :
    • पुस्तक : लोक रागिनी (पृष्ठ 142)
    • रचनाकार : भोलानाथ गहमरी
    • प्रकाशन : रागिनी प्रकाशन, गाजीपुर
    • संस्करण : 1995

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