रउआ खाये के ना लूर बा, जिआन करीला
raua khaye ke na loor ba, jian karila
विजेन्द्र अनिल
Vijendra Anil
रउआ खाये के ना लूर बा, जिआन करीला
raua khaye ke na loor ba, jian karila
Vijendra Anil
विजेन्द्र अनिल
और अधिकविजेन्द्र अनिल
रउआ खाये के ना लूर बा, जिआन करीला
संउसे देसवा के काहे, परेसान करीला?
करिया पइसा के बूता प दोकान खोलिके
रऊआ कंठी लेके राम के धेयान करीला
जेकर खूनवा पसेनवा बहेला हरदम,
काहे जिनिगी के गाड़ी ओकर जाम करीला?
रऊआ साहेबन के सोझवा डोलाइ पोंछिया
अपना कबजा में फैक्टरी-खदान करीला
अपना छंवड़ा के देवे खातिर गद्दी सोगहग
संउसे देसवा के निनिआँ हराम करीला
रउरा बीवी के मजार प त ताज बनेला
हमरा मउगी के दिने में नीलाम करीला।
- पुस्तक : हम कबीर के बानी (चयन : अरविन्द कुमार) (पृष्ठ 34)
- रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
- प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
- संस्करण : 2009
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