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सहज सनेहिया भींजे ना (बरखा राग)

sahj sanehiya bhinje na (barkha raag)

अशोक द्विवेदी

अशोक द्विवेदी

सहज सनेहिया भींजे ना (बरखा राग)

अशोक द्विवेदी

और अधिकअशोक द्विवेदी

    घुमड़त आइल भुवर बदरवा

    मोरा दुअरा मध-दुपहरिया रामा,

    अरे रामा, झमर-झमर जलबुनियन से

    मोर देहियाँ भींजे ना।

    फहरे फाटल मोर अँचरवा

    अचके लागल बरिसे धरवा

    डँकरे बिन बछवा मोर गइया रामा,

    अरे रामा बोले मोर बछरुआ

    सहज-सनेहिया भींजे ना।

    खटिया भींजे, ओढ़ना भींजे

    लेवना भींजे, लौना भींजे

    भींजे डालल मोर पथार रामा,

    अरे रामा छोटहन मोर पलनिया

    सूप-दउरिया भींजे ना।

    डूबी रोपल सउँसे धान

    बदरा बाटे बहुत अमान

    अब त, गरजि-लरजि घन घहरे रामा,

    अरे रामा, बरिसे छपनो-कोट

    मोर बटोहिया भींजे ना!

    स्रोत :
    • पुस्तक : फूटल किरिन हजार (पृष्ठ 38)
    • रचनाकार : अशोक द्विवेदी
    • प्रकाशन : पाती प्रकाशन, बलिया
    • संस्करण : 2003

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