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गाँव नीक बा

gaanv neek ba

पिया जनि जा तू कवनो शहरिया,

शहरिया से गाँव नीक बा।

छोड़ि दऽ तू आपन नोकरिया,

नोकरिया से गाँव नीक बा॥...

इहवें करऽ मन से खेती किसानी।

उपजी अनाज रही नाही परेशानी।

अन्न से भरि जाई अपनो बखरिया,

शहरिया से गाँव नीक बा॥...

गेहूं, चना, धान, मटर उपजावऽ।

खेतवा के मेड़वा पर पेड़वा लगाव॥

घर की नियरे लगाव फुलवरिया,

शहरिया से गाँव नीक बा॥...

करबऽ मजूरी इहें दिन कटि जाई।

सब्जी की खेती से होई कमाई॥

लागे लागल अब गउवों बजरिया,

शहरिया से गाँव नीक बा॥...

बैंक से कर्जा मिलेला उधारी।

किनिहऽ भइसिया दूगो दुधारी॥

सुध दूध मिली ताजी तरकरिया,

शहरिया से गाँव नीक बा॥...

स्रोत :
  • पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 16)
  • रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
  • प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
  • संस्करण : 2010

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