कब मिलिहें पियवा हमार निरमोहिया रे
kab milihen piyva hamar nirmohiya re
महेन्द्र मिसिर
Mahendra Misir
कब मिलिहें पियवा हमार निरमोहिया रे
kab milihen piyva hamar nirmohiya re
Mahendra Misir
महेन्द्र मिसिर
और अधिकमहेन्द्र मिसिर
कब मिलिहें पियवा हमार निरमोहिया रे,
कब मिलिहें पियवा हमार?
बइठल करीं हम मन के गुनावन
चढ़ल जवनिया भइली भकसावन
ताना मारे सखिया हजार निरमोहिया रे
कब मिलिहें पियवा हमार?
सोरहो सिंगार करि करींले सगुनवाँ
पिया नाहीं छोड़िहन अबकी फगुनवाँ
नइहर में नइखे गुजार निरमोहिया रे
कब मिलिहें पियवा हमार?
दिन-रात बहेला नयनवाँ से पानी
तोरा बिना पियवा बेकार जिन्दगानी
काहे दिहलऽ सुधिया बिसार निरमोहिया रे
कब मिलिहे पियवा हमार?
कहत महेन्दर, गोरी धीर धरऽ मनवाँ
फागुन चढ़त अइहें तोहरो मोहनवाँ
मनवाँ के पूरी अरमान निरमोहिया रे
कब मिलिहे पियवा हमार?
- पुस्तक : महेन्द्र मिसिर के चुनिंदा भोजपुरी गीत (पृष्ठ 41)
- संपादक : भगवती प्रसाद द्विवेदी
- रचनाकार : महेन्द्र मिसिर
- प्रकाशन : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली
- संस्करण : 2021
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