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हिन्दवी ब्लॉग

साहित्य और कला की विभिन्न विधाओं का संसार

शहर, अतीत और अंत के लिए

शहर शहर अपने आपमें कितना कुछ समेटे रहता है—बहुत सारी त्रासदी, पलायन, सांप्रदायिक दंगे और बहुत सारी ख़ुशियाँ भी। आप बहु ...और पढ़िए

प्रदीप्त प्रीत | 03 अक्तूबर 2023

दुनिया के बंद दरवाज़ों को शब्दों से खोलता साहित्यकार

हर बार जब आरा पहुँचता था, तो रामनिहाल गुंजन जी से ज़रूर मिलता था। इस बार 10 अप्रैल को पहुँचने के बाद उन्हें फ़ोन किया, तो ...और पढ़िए

सुधीर सुमन | 01 अक्तूबर 2023

‘प्रेम में मरना सबसे अच्छी मृत्यु है’

इस सृष्टि में किसी के प्रेम में होना मनुष्य की सबसे बड़ी नेमत है। उसके सपनों के जीवित बचे रहने की एक उम्मीद भरी संभावना। ...और पढ़िए

दया शंकर शरण | 29 सितम्बर 2023

हिंसा ही नहीं है हिंदी

हिंदी एक विचारधारा है और यह विचारधारा पुनरुत्थानवादी और सांप्रदायिक है जो किसी प्रतिगामी हिंदी राष्ट्रवाद से अभिज्ञापित ...और पढ़िए

देवी प्रसाद मिश्र | 28 सितम्बर 2023

पंक्ति प्रकाशन की चार पुस्तकों का अंधकार

‘कवियों में बची रहे थोड़ी लज्जा’ मंगलेश डबराल की इस पंक्ति के साथ यह भी कहना इन दिनों ज़रूरी है कि प्रकाशकों में भी बच ...और पढ़िए

पंकज प्रखर | 26 सितम्बर 2023

'रफ़्तगाँ में जहाँ के हम भी हैं'

आदिम युग से ही कृति के साथ कर्ता भी हमेशा ही कौतूहल का विषय बना रहा है। जो हमसे भिन्नतर है, वह ऐसा क्यों है, इसकी जिज्ञा ...और पढ़िए

प्रज्वल चतुर्वेदी | 22 सितम्बर 2023

आज की कविता के सरोकार तथा मूल्यबोध

मैं गद्य का आदमी हूँ, कविता में मेरी गति और मति नहीं है; यह मैं मानता हूँ और कहता भी हूँ फिर भी यह इच्छा हो रही है कि आज ...और पढ़िए

हरी चरन प्रकाश | 22 सितम्बर 2023

विछोह की ख़ूबसूरती अधूरेपन में है

रज़िया सुल्तान में जाँ निसार अख़्तर  का लिखा और लता मंगेशकर का गाया एक यादगार गीत है : ‘‘ऐ दिल-ए-नादाँ...’’, उसके एक अंतर ...और पढ़िए

सुदीप्ति | 20 सितम्बर 2023

गणितीय दर्शन और स्पेस-टाइम फ़ैब्रिक पर रची अज्ञात के भीतर हाथ फेरती कविताएँ

...कहाँ से निकलती हैं कविताएँ? उनका उद्गम स्थल कहाँ-कहाँ पाया जा सकता है? आदर्श भूषण के यहाँ कविताएँ टीसों के भंगार से, ...और पढ़िए

प्रतिभा किरण | 20 सितम्बर 2023

कुँवर नारायण की कविता और मुक्तिबोध की आलोचना-दृष्टि

मौजूदा समय के संकटों और चिंताओं के बीच जब हमें मुक्तिबोध याद आते हैं, तो न केवल उनकी कविताएँ और कहानियाँ हमें याद आती है ...और पढ़िए

सुशील सुमन | 19 सितम्बर 2023