संस्कृत नाट्य-शास्त्र में पंच-संधियाँ और अर्थ-प्रकृतियाँ
संधि-पंचकः नाटक का रचनात्मक तत्त्व
संस्कृत नाट्य-शास्त्र में नाटक का जो रचनात्मक विश्लेषण है उसमें 'संधि-पंचक' (पाँच संधियों) का ही महत्व सर्वोपरि है। नाटककार 'संधि-पंचक' की योजना करते हुए नाटक की रचना नहीं किया करता। नाटककार की कला नाटक की रूपरेखा