‘‘सलाम करके गुज़रता था जिस मज़ार को मैं’’
उसने काग़ज़ पर ये मिसरा लिखा और शाइर का नाम सोचने लगा।
कुछ देर बाद उसने ये वाक्य : ‘‘अंत ही आरंभ है…’’ लिखा और काट दिया। फिर एक लंबी बुत-नुमाई के बाद कुफ़्र
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