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प्रायश्चित पर ग़ज़लें

किसी दुष्कर्म या पाप

के फल भोग से बचने के लिए किए जाने वाले शास्त्र-विहित कर्म को प्रायश्चित कहा जाता है। प्रायश्चित की भावना में बहुधा ग्लानि की भावना का उत्प्रेरण कार्य करता है। जैन धर्म में आलोचना, प्रतिक्रणण, तदुभय, विवेक, व्युत्सर्ग, तप, छेद, परिहार और उपस्थापना—नौ प्रकार के प्रायश्चितों का विधान किया गया है।

पूरल ने एको आस हिया

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

जनमे से बाटे उधार हमार

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

हिन्दवी उत्सव 2026

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