रात पर अनुवाद

उजाले और अँधेरे के प्रतीक

रूप में दिन और रात आदिम समय से ही मानव जिज्ञासा के केंद्र रहे हैं। कविताओं में रात की अभिव्यक्ति भय, आशंका और उदासी के साथ ही उम्मीद, विश्राम और शांति के रूप में हुई है। इस चयन में उन कविताओं को शामिल किया गया है; जिनमें रात के रूपक, प्रतीक और बिंब से जीवन-प्रसंगों की अभिव्यक्ति संभव हुई है।

आवाज़ें-174

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-93

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-88

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-240

अंतोनियो पोर्चिया

रात का पेड़

राही मासूम रज़ा

शिकायत

राही मासूम रज़ा