एलजीबीटीक्यूआईए+ प्राइड विशेष पर बेला
LGBTQIA+ साहित्य उन
अनुभवों का साहित्य है जिन्हें लंबे समय तक मौन, निषेध और अदृश्यता में जीना पड़ा। प्रेम, इच्छा, देह, अस्मिता और आत्मस्वीकृति—इन सबके अर्थ यहाँ नए नहीं, बल्कि अधिक सचाई से सामने आते हैं। इस संकलन की कविताएँ विश्व कविता के उन स्वरों का प्रतिनिधित्व करती हैं जिन्होंने क्वियर जीवन को करुणा, गरिमा, सौंदर्य और निर्भीकता के साथ अभिव्यक्त किया है। इनमें प्रेम है, प्रतिरोध है, अकेलापन है, उत्सव है, स्मृति है और अपने होने के अधिकार का शांत किंतु अडिग विश्वास भी।
शनिवारेर चिट्ठी : पुलिसवाली है या लेस्बियन, उधर जो औरत है? कहाँ?
पूर्वग्रह मुहल्ले में ‘मौग’ होना उपहास की बात थी। बसों-ट्रामों में हाथ बजाकर अपनी पहचान जताना किसी हीनता की निशानी। और मैदान के अँधेरे कोनों में खींच लिया जाता अथवा स्वेच्छा से ‘व्यभिचार’ में