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लालनाथ

जसनाथ संप्रदाय से संबद्ध। सच्ची आत्मानुभूति और मर्मबेधिनी वाणी के धनी संतकवि।

जसनाथ संप्रदाय से संबद्ध। सच्ची आत्मानुभूति और मर्मबेधिनी वाणी के धनी संतकवि।

लालनाथ की संपूर्ण रचनाएँ

दोहा 30

होफाँ ल्यो हरनांव की, अमी अमल का दौर।

साफी कर गुरुग्यान की, पियोज आठूँ प्होर॥

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क्यूँ पकड़ो हो डालियाँ, नहचै पकड़ो पेड़।

गउवाँ सेती निसतिरो, के तारैली भेड़॥

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खेलौ नौखंड माँय, ध्यान की तापो धूणी।

सोखौ सरब सुवाद, जोग की सिला अलूणी॥

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टोपी धर्म दया, शील की सुरंगा चोला।

जत का जोग लंगोट, भजन का भसमी गोला॥

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लाय लगी घर आपणै, घट भीतर होली।

शील समँद में न्हाइये, जाँ हंसा टोली॥

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