साँवले सपनों की याद
सुनहरे परिंदों के ख़ूबसूरत पंखों पर सवार साँवले सपनों का एक हुजूम मौत की ख़ामोश वादी की तरफ़ अग्रसर है। कोई रोक-टोक सके, कहाँ संभव है।इस हुजूम में आगे-आगे चल रहे हैं, सालिम अली। अपने कंधों पर, सैलानियों की तरह अपने अंतहीन सफ़र का बोझ उठाए। लेकिन यह सफ़र