इच्छा से मुँह फेरकर

गगन गिल

इच्छा से मुँह फेरकर

गगन गिल

और अधिकगगन गिल

    दोस्ती में प्रेम था

    प्रेम में इच्छा

    इच्छा से मुँह फेर कर

    वह कहाँ जाएगी?

    इच्छा से मुँह फेरकर

    वह रेल की पटरी पर जाएगी

    या झील के किनारे

    या नींद की दसवीं गोली के सिरहाने

    तीसरी मंज़िल की मुँडेर पर

    अंतिम इच्छा के संकोच तक

    प्रेम में इच्छा थी, इच्छा में तृष्णा

    तृष्णा क्यों माँगती थी

    अपने लिए जगह?

    काफ़ी नहीं थी तृष्णा के लिए

    उनींद, अधनींद, स्वप्न का दोष

    तृष्णा से बचकर वह कहाँ रहेगी?

    तृष्णा से बचकर

    वह अपनी देह में रहेगी

    कभी उतरने वाले

    निन्यानवे के बुख़ार की तरह

    पाप की ऐंठन की तरह

    प्रेम में इच्छा थी

    इच्छा में देह

    देह जब नहीं बचेगी

    इच्छा कहाँ रहेगी?

    स्रोत :
    • पुस्तक : एक दिन लौटेगी लड़की (पृष्ठ 112)
    • रचनाकार : गगन गिल
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
    • संस्करण : 1989

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