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औरतें

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यानिस रित्सोस

अन्य

अन्य

और अधिकयानिस रित्सोस

    औरतें बहुत दूर हैं। उनकी चादरों से शुभरात्रि की

    महक आती है।

    वे ब्रेड लाकर मेज़ पर रख देती हैं ताकि हमें यह लगे

    कि वे अनुपस्थित हैं।

    तब हमें यह महसूस होता है कि यह हमारी ग़लती थी। हम

    कुर्सी से उठते हैं और कहते हैं :

    आज तुमने बहुत ज़्यादा काम कर लिया या

    तुम रहने दो, बत्ती मैं जला लूँगा।

    जब हम माचिस जलाते हैं तो वह आहिस्ता से मुड़ती है

    और एक अनिर्वचनीय एकाग्रता के साथ

    रसोईघर की तरफ़ जाती है। उसकी पीठ एक बेहद उदास

    पहाड़ी है कई मृतकों से लदी हुई—

    परिवार के मृतक, उसके मृतक, तुम्हारी ख़ुद की मृत्यु।

    तुम पुराने लकड़ी के फ़र्श पर उसके चरमराते क़दमों को

    सुनते हो। तुम अलमारी में तश्तरियों का रोना

    सुनते हो। फिर तुम उस ट्रेन की आवाज़ सुनते हो

    जो मोर्चे की ओर फ़ौजियों को ले जाती है।

    स्रोत :
    • पुस्तक : दरवाज़े में कोई चाबी नहीं (पृष्ठ 162)
    • संपादक : वंशी माहेश्वरी
    • रचनाकार : यानिस रित्सोस
    • प्रकाशन : संभावना प्रकाशन
    • संस्करण : 2020

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