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स्तन

stan

अनुवाद : शायक आलोक

कुट्टी रेवती

और अधिककुट्टी रेवती

    स्तन बुलबुलों जैसे हैं, जो ऊपर उठते हैं

    गीले दलदली प्रदेशों में

    मैंने विस्मय से देखा—और उन्हें सँभाला भी—

    उनका धीरे-धीरे उभरना और खिलना

    मेरी युवावस्था के मौसम की सरहदों पर

    किसी और से कुछ कहते हुए

    वे साथ गुनगुनाते हैं

    सिर्फ़ मेरे, हमेशा ही :

    प्रेम के

    उल्लास के

    और दिल टूटने के गीत

    मेरे बदलते मौसमों की नर्सरियों तक

    वे कभी भूले, ही चूके

    उत्तेजना जगाने में

    तप के समय वे फूल उठते हैं, मानो

    मुक्त होने को छटपटा रहे हों; और वासना के तीव्र खिंचाव में

    वे उड़ान भरते हैं—संगीत के उन्माद को स्मरण करते हुए

    आलिंगन के दबाव से वे निथारते हैं

    प्रेम का सार; और शिशु को पहली बार देखने

    के हिलोड़ में खींच लेते हैं दौड़ते रक्त से दूध

    अपूर्ण प्रेम से गिरी दो अश्रु-बूँदों की तरह

    जिन्हें कभी पोंछा नहीं जा सकता

    वे शोक की तरह उमड़ते हैं और छलक पड़ते हैं।

    स्रोत :
    • रचनाकार : कुट्टी रेवती
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए शायक आलोक द्वारा चयनित

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