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मुला बस अवधी मा

mula bas avadhi ma

मनोज मिश्र ‘कप्तान

मनोज मिश्र ‘कप्तान

मुला बस अवधी मा

मनोज मिश्र ‘कप्तान

और अधिकमनोज मिश्र ‘कप्तान

    कूदौ छटकौ नंगाव, मुला बस अवधी मा।

    आपन जाति जनाव, मुला बस अवधी मा।

    अपने बोली भाषा कै महिमा देखव,

    मन कै मिटै दुराव, मुला बस अवधी मा।

    जीजा, साली, देवर, भउजी सब मिलिकै,

    खूब करौ ठलुहाव, मुला बस अवधी मा।

    उतराही दखिनहर, मेर चौवाय बहौ,

    पुरवाई पछियाव, मुला बस अवधी मा।

    माटी कै मिठास चाहौ तौ टहरौ खुब,

    बलिया से उन्नाव, मुला बस अवधी मा।

    दूरि देस मा कोहिस, कहूँ झगरा होइगा,

    जिव भरिकै गरियाव, मुला बस अवधी मा।

    बाभन ठाकुर बनिया महतौ लाला से,

    बोलै बात मुराव, मुला बस अवधी मा।

    माटी कै दुइ लोग, मिलौ मंगल ग्रह पर,

    खुब बोलव बतुवाव, मुला बस अवधी मा।

    दिल्ली मिलिगे, गाँव गढ़िक चाचा, बोले,

    हे “कप्तान”, सुनाव, मुला बस अवधी मा।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अवधी मिठास (पृष्ठ 62)
    • रचनाकार : मनोज मिश्र ‘कप्तान’
    • प्रकाशन : सर्वभाषा प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2025

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