Font by Mehr Nastaliq Web

हमारा समय

hamara samay

निकोलाई रेरिख

निकोलाई रेरिख

हमारा समय

निकोलाई रेरिख

और अधिकनिकोलाई रेरिख

    उठो मित्र, समाचार मिल चुका है

    पूरे हो गए हैं तुम्हारे विश्राम के क्षण।

    अब मालूम हुआ है मुझे

    कहाँ खो गया था

    पवित्र चिन्हों में से एक वह चिन्ह।

    सोचो तो कितनी ख़ुशी होगी हमें

    यदि ढूँढ़ सकें हम वह चिन्ह!

    हमें निकल जाना होगा सूरज निकलने से पहले

    पूरी करनी होंगी तैयारियाँ एक रात में।

    देखो तो कैसा है आज की रात का आकाश!

    पहले कभी नहीं दिखा वह इतना सुंदर।

    उसका यह रूप मुझे याद नहीं रह सकेगा

    अभी कल ही तो आसंदी

    इतनी उदास थी और इतनी निष्प्रभ,

    सहमी-सहमी टिमटिमा रही थी चित्रा

    और शुक्र ने तो दर्शन ही नहीं दिए,

    पर अब सब चमकने लगे हैं

    चमक उठे हैं सप्तऋषि और स्वाति।

    दूर नक्षत्र मालाओं के पीछे

    चमकने लगे हैं नए-नए तारे

    दिखने लगा है

    आकाशगंगाओं का स्पष्ट और पारदर्शी धुँधलापन।।

    क्या तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा यह रास्ता

    जिस पर से हमें खोज निकालना है कल उसे

    जाग उठे हैं आकाश पर अंकित अक्षर।

    उठाओ अपनी संपदा!

    अपने साथ हथियार ले जाने की ज़रूरत नहीं।

    जूते कस कर पहनना

    कस कर बाँधना अपनी कमर

    पत्थरों से भरा होगा हमारा रास्ता

    चमकने लगा है पूरब।

    समय गया है अब हमारा।

    स्रोत :
    • पुस्तक : निकोलाई रेरिख की कविताएँ (पृष्ठ 29)
    • रचनाकार : निकोलाई रेरिख
    • प्रकाशन : रेरिख अध्ययन परिषद, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1995

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY