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रहीसी ठाठु

rahisi thathu

दुफरदा नीम सारी ओढ़ि क्वइरा पर जहाँ बइठय्न

धन्ना सेठि सोंठी साहु के बच्चा ति हम अडँठय्न।

महतिया मान मतई मीत, आवयि लागि खगनन्दन

बदिनि सरपञ्चु हमका माँबिलइ मा माँबिला छाँट्यन।

चली कुछ बात सगपहिता कि, हींगइ-हींग सब बोले!

बनइ भाँटा के भरता हम तेलुइ-तेलु चिल्लान्यन।

भरे भादउँ मा भादा ख्यात मा जामा भगोले के

जो बरुधुइ होति, तउ काहे किसानी जाति हम बोल्यन।

कहिनि कढ़िले तनुकु काकनि कच्यहरी के कहउ किरला,

दिह्यन इसपीचु तड़पड़ ते तमाखू चून फटकार्यन।

नरदहा केरि नालिस मा, कि दादनि की द्यवानी मा

गिरिस्ती खुक्खु कयि दीन्ह्यन नाऊँ अल्लामु तब पायन।

बिटउनी के बियाहे मा रहयिं ड्यारा पतुरियन के

भवा म्वजरा छ्वटक्की का, हम म्याघा तना बरस्यन।

परागी पूत की पटिया कि मइकू म्याड़ छाँटिनि तब

बजी लाठी फँसायन तीनि का, तब हम घरयि आयन।

रहयि आँधी टिप्पा अउ ज्वँधइयउ जब चली अथवयि,

मजे मा भाँग परि गयि याक असि ल्यलकार सुनि पायन

तिलङ्गा चारि, थानेदार, चउकीदार घर आये

लालि पगड़ी के सुनतयि सब जने भुड़न तरे भाज्यन।

स्रोत :
  • पुस्तक : पढ़ीस ग्रंथावली (पृष्ठ 118)
  • संपादक : डॉ. रामविलास शर्मा, युक्तिभद्र दीक्षित
  • रचनाकार : बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'
  • प्रकाशन : उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ
  • संस्करण : 1998

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