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हम कनउजिया बाँभन आहिन

hum kanaujiya banbhan aahin

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

हम कनउजिया बाँभन आहिन

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    मरजाद पूरि बीसउ बिसुवा,

    हम कनउजिया बाँभन आहिन।”

    थाने पर बयिठ खरे खट-कुलु

    हम कनउजिया बाँभन आहिन!

    दुलहिनी तीनि लरिका त्यारह,

    सब भिच्छा-भवन ति पेटु भरयिं,

    घर मा मूसा डंडयि प्यालयिं,

    हम कनउजिंया बाँभन आहिन!

    बिटिया बयिठीं बत्तिस की,

    पोती बर्स अठारह की झलकीं,

    मरजाद का झंडा झूलि रहा,

    हम कनउजिया बाँभन आहिन!

    चउथेपन चउथ बियाहे के

    बिहकरा बयिठ घर का घेरे,

    चउथ दिन चउथो चाल चलीं,

    हम कनउजिया बाँभन आहिन!

    वह स्वारह की कचनारु अयिसि,

    हम सत्तरि के मूँहुँ बायि रहे,

    म्वाँछन मा उकुवाई कूचिसि,

    हम कनउजिया बाँभन आहिन!

    बर्धन की पूँछयि अँइठि-अँइठि,

    भइँसिन का लट्ठन पीटि-पीटि,

    सिरमउरन का सिरमउर बँधा,

    हम कनउजिया बाँभन आहिन!

    लरिकऊ चरावयि हरहा, बिनुआ

    कंडा बीनयिं बड़े चतुर,

    दायिज के लाओ दुइ हजार,

    हम कनउजिया बाँभन आहिन!

    हर की मुठिया खुद गहि पायी,

    तउ ख्यातन लछिमी फाटि परयि;

    मुलु तीनि तिलोकु कहाँ जायी,

    हम कनउजिया बाँभन आहिन!

    गायित्री-मंत्रु 'भूर भूसा' जपि-जपि रोजुइ चिल्लायिति हयि,

    हम कनउजिया! हम कनउजिया!! हम कनउजिया बाँभन आहिन!!!

    स्रोत :
    • पुस्तक : पढ़ीस ग्रंथावली (पृष्ठ 135)
    • संपादक : डॉ. रामविलास शर्मा, युक्तिभद्र दीक्षित
    • रचनाकार : बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'
    • प्रकाशन : उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ
    • संस्करण : 1998

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